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व्यसन है मृत्यु का द्वार.

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नागपुर:-

प्रतिनिधी:-अजय पाण्डे

नशा चाहे वह तम्बाकू का हो या शराब का या हो किसी भी नशीले पदार्थ का , मृत्यु का ही द्वार कहा जायेगा । तम्बाकू में निकोटिन , कोलतार, आर्सेनिक , कार्बन मोनाक्साइड अथवा कोयले की गैस होती है । *निकोटिन जो तम्बाकू में होता है वह हमारे फेफड़ों को खराब करता है । सिगरेट पीने से पैर लड़खड़ाते हैं । साथ ही कुछ समय बाद पैरों में भयंकर कमजोरी आने लगती है । कानों में बहरापन आता है । *आंखों में भी खराबी आने लगती है । निकोटिन से ब्लडप्रेशर बढ़ता है । त्वचा सुन्न होने लगती है । निकोटिन से खांसी और दमा बढ़ता है । *एक पौंड तम्बाकू में निकोटिन नामक जहर की मात्रा 22 : 8 ग्राम होती है । माना जाता है कि इसकी 6 मिलीग्राम मात्रा एक कुत्ते को तीन मिनिट में जान से मार देती है । *एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मुँह और गले के कैंसर के रोगी भारत में अन्य देशों की तुलना में 50 गुणा अधिक है । ये सारे नशेड़ी बीड़ी, सुरती, खैनी हुक्का आदि के रूप में तम्बाकू से ही जुड़े हैं । *भारत में मुंह, जीभ ,उपरी श्वास तथा भोजन नली का कैंसर सारे विश्व में अधिक पाया जाता है । *अनुसन्धान बताता है कि गालों में होने वाले कैंसर का मुख्य कारण खैनी अथवा जीभ के नीचे रखी जाने वाली , चबाने वाली तम्बाकू है । *गले के ऊपरी हिस्से , जीभ और पीठ में कैंसर होने का मुख्य कारण बीड़ी पीना है । *धूम्रपान करने वालों की पाचन क्रिया बिगड़ जाती है । ऐसे लोग कब्ज और अपच के शिकार होते हैं ।भारत में एक सिगरेट पीने वाले की आयु 5 मिनिट कम हो जाती है ।* 20 सिगरेट या 15 बीड़ी प्रतिदिन पीने वाला एवम करीब 5 ग्राम सुरती, खैनी आदि के रूप में तम्बाकू खाने वाला व्यक्ति अपनीं आयु में से 10 वर्ष कम कर लेता है । जितने भी दिन वह जिंदा रहता है वह विभिन्न बीमारियों से घिरा रहता है । समय रहते यदि नशे से दूर नहीं हुए तो जीवन नरक बनने में समय नहीं लगता ।
शराब भयंकर अभिशाप

आधुनिकता के नाम पर आजकल हर वर्ग के लोगों में शराब पीने का प्रचलन बढ़ गया है । शराब पीना फैशन बन चुका है । स्टेटस सिंबल बन चुका है । *इसका एक कारण दुःख-पीड़ा भूलना बताते हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है । दुःख तो दूर नहीं होते उल्टे परेशानियों के चक्र में फंसता चला जाता है । शराब के साथ अल्कोहल पेट में जाते ही वह अमाशय से पानी सोखने लगता है । *विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि यदि शराब की बोतल में एक मांस का टुकड़ा डाल दिया जाए तो वह कुछ ही देर में गलकर रेशे-रेशे बन जाता है । *उसीप्रकार जब अल्कोहल का जमाव रक्त में 0:2 प्रतिशत से 0:5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो तेज नशे की हालत में शराब पीने वाले व्यक्ति की तुरन्त मृत्यु हो जाती है । पी गई शराब में से 2 से 10 प्रतिशत शराब पसीने, फेफड़े और पेशाब के मार्ग से निकल जाती है । शेष 60 प्रतिशत शराब का बोझ यकृत झेलता है । *रक्त में 0: 03 प्रतिशत शराब मनुष्य की कार्यक्षमता गड़बड़ा देती है, 0: 05 प्रतिशत शराब कुछ हद तक मानसिक सन्तुलन बिगाड़ने का काम करती है । अधिक मात्रा में शराब सेवन करने पर एक्सीडेंट के अवसर 7 गुणा, शरीर में पॉइजनिंग के अवसर 30 गुणा , मृत्यु होने के अवसर 16 गुणा बढ़ जाते हैं । सबसे बड़ी हानी लीवर की होती है । *रोज शराब पीने और खाना नहीं खाने की वजह से चर्बी के कण जमा होने लगते हैं जिससे सिरोसिस नामक रोग होता है । इसके कैन्सर में बदलने की संभावना बढ़ जाती है । इसलिए नशा करने वाले को चाहिए कि वह तम्बाकू और शराब से बचें । *नशे के कारण निराशा और कुंठा व्यक्ति के जीवन का अंग बन जाते हैं । उसका आचरण उग्र और आपराधिक प्रवृत्ति का बन जाता है । *नशा उतरने के बाद शराबी सामान्य तो दिखता है लेकिन उसकी मानसिक शक्ति की जड़ें खोखली होने लगती है । शराब पीने से व्यक्ति की प्रोस्टेट ग्रन्थि में सूजन आ जाती है, *जिसके कारण उसके नपुंसक होने की भी संभावना बढ़ जाती है । मद्यपान से गुर्दे शीघ्र नष्ट होने लगते हैं । *कहा जाता है कि जब शराब मनुष्य के शरीर के भीतर प्रवेश करती है तो वह सबसे पहले मनुष्यता को बाहर निकाल देती है । यदि आप सदैव स्वस्थ- मस्त और तंदुरुस्त रहना चाहते हैं तो आपको चाहिए कि आप हमेशा हर-तरह के नशे से दूर रहें !
श्री शिर्डी सांई द्वारकामाई पदयात्रा सेवा समिति, भगवान नगर नागपुर की ओर से जनहित में प्रचारित

Nikita Wagde
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